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आज की बड़ी खबर आपके साथ साझा कर रहे हैं, जो सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण से जुड़ी है।
हाल ही में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (DoSJE) और नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंचने में सहायता करना है।
इसी मौके पर SARTHIE 1.0 पहल की भी शुरुआत की गई, जिसका लक्ष्य समाज के सबसे कमजोर वर्गों को जागरूकता और कानूनी सहायता के माध्यम से सशक्त बनाना है। इसमें विशेष रूप से अनुसूचित जातियों (SCs), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs), वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, नशा पीड़ित, भिक्षावृत्ति करने वाले लोग, तथा विमुक्त और घुमंतू जनजातियों को शामिल किया गया है।
SARTHIE 1.0 का उद्देश्य है कि समाज के इन कमजोर वर्गों को सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ मिले। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडा से भी मेल खाती है, जिसमें गरीबी उन्मूलन और असमानता घटाने पर जोर दिया गया है।
MoU के प्रमुख बिंदु:
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता से जुड़े विभिन्न अधिनियमों और योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
- NALSA और DoSJE द्वारा जागरूकता अभियान, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन।
- कानून के पांच प्रमुख अधिनियमों के प्रति जागरूकता फैलाना, जैसे कि:
- सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955
- अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
- वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल अधिनियम, 2007
- ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019
- मैला ढोने पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013
इस सहयोग से जिला और राज्य स्तर की कानूनी सेवा प्राधिकरण (SLSAs/DLSAs) गांव-गांव में जागरूकता शिविर लगाएंगी। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को उनके कानूनी अधिकार और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
तो दोस्तों, समाज के कमजोर वर्गों को न्याय और सशक्तिकरण की ओर एक बड़ा कदम उठाया जा चुका है। इस खबर से जुड़े और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए सोशल अड्डाबाज़ पर! नमस्कार
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