Wednesday, September 25, 2024

अंतरिक्ष क्षेत्र में नए क्षितिज: चंद्र अन्वेषण से लेकर राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक

 भारत अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति करने जा रहा है, जिसके लिए हाल ही में कई महत्वाकांक्षी मिशनों को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में ये परियोजनाएँ भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुसंधान में अग्रणी बनने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। प्रमुख पहलों में आगामी चंद्रयान-4 मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) परियोजना शामिल हैं, जो भारत की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने और उद्योग में सहयोग को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती हैं।

चंद्रयान-4 मिशन

चंद्रयान-4 मिशन का उद्देश्य सफल चंद्र लैंडिंग के बाद चंद्रमा से नमूनों को पृथ्वी पर वापस लाने के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। यह मिशन भारत के 2040 तक मानव चंद्रमा मिशन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह डॉकिंग, लैंडिंग और नमूना संग्रह के लिए उन्नत तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह मिशन ISRO द्वारा प्रबंधित किया जाएगा और इसकी कुल लागत ₹2,104.06 करोड़ होने की उम्मीद है। इसमें भारतीय उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ व्यापक सहयोग भी शामिल होगा, जो महत्वपूर्ण रोजगार और तकनीकी विकास उत्पन्न करेगा।

वीनस ऑर्बिटर मिशन

वीनस ऑर्बिटर मिशन (VOM) चंद्रमा और मंगल के बाद भारत के ग्रह अन्वेषण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मिशन मार्च 2028 में लॉन्च किया जाएगा और इसका उद्देश्य वीनस के चारों ओर एक वैज्ञानिक अंतरिक्ष यान स्थापित करना है। यह मिशन ग्रह की वायुमंडलीय और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ प्रदान करेगा। इस मिशन का बजट ₹1,236 करोड़ है, और यह भारत की भविष्य की ग्रह अन्वेषण क्षमताओं को मजबूत करेगा।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का निर्माण गगनयान कार्यक्रम के विस्तार का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। इस कार्यक्रम में मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए विभिन्न मिशनों का समावेश किया गया है, जिसमें 2028 तक आठ मिशनों को पूरा करने का लक्ष्य है। BAS की स्थापना से सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

केंद्रीय बजट 2024-25

केंद्रीय बजट 2024-25 में, सरकार ने अंतरिक्ष स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड स्थापित करने की घोषणा की है, जिससे भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जा सके।

निष्कर्ष

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक रोमांचक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जो महत्वाकांक्षी मिशनों और तकनीकी प्रगति से भरा है। चंद्रयान-4, वीनस ऑर्बिटर मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की मंजूरी भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं को बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ये परियोजनाएँ न केवल भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करेंगी बल्कि तकनीकी नवाचार और महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेंगी।

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